
कभी आपने सोचा है कि आखिर ड्राई क्लीनिंग के बारे में इंसान ने कैसे सोचा होगा? दरअसल इसके पीछे की कई कहानियों में से एक कहानी यह कई साल पहले पेट्रोल युक्त एक पदार्थ गलती से 1 गंदे चिकने कपड़े पर किसी के हाथ से फैल गया था। थोड़ी देर में पेट्रोल युक्त पदार्थ के साथ ही वह दाग भी चला गया और बताया जाता है कि इसी घटना के साथ ही ड्राई क्लीनिंग का विचार जन्मा। ड्राई क्लीनिंग सेंटर्स में कई कपड़े पहुंचते हैं। यहां सबसे पहले कपड़ों पर लगे दाग हटाने का काम किया जाता है जो सामान्य धुलाई से नहीं हटते। फिर उन्हें ड्राई क्लीनिंग की स्पेशल मशीनों में साफ करने वाले रसायनों के साथ धोया जाता है। फिर उन्हें ड्राई क्लीनिंग की स्पेशल मशीनों में साफ करने वाले रसायनों में नीचोड़ा जाता है। इसके बाद गर्म हवा में सुखाकर स्टीम प्रेस की जाती है। पेरिस के जाॅली बेलीन को पहला ड्राई क्लीनर कहां जाता है। उन्होंने 1840 में अपनी पहली ड्राई क्लीनिंग की दुकान खोली थी। उस समय कैंफेन, बेंजीन, केरोसीन और गैसोलीन इस काम के लिए उपयोग में लाए जाते थे।
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