परवरिश:- बच्चों के रोल मॉडल बन कर दे एक अच्छी परवरिश

“क्षमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात” – रहीम जी का यह दोहा उस समय तक अच्छा लगता है, जब तक एक बच्चा अपने कदमों पर चलना नहीं शुरू करता है। दो वर्ष का छोटा बच्चा जैसे ही ठुमकते कदमों से चलना शुरू करता है, तब माता-पिता उसे सम्मान का सबसे पहले पाठ के रूप में उसे हाथ जोड़कर नमस्ते करना सिखाना चाहते हैं।

अब कुछ बच्चे तो तुरंत बात मान लेते हैं, लेकिन कुछ नटखट बालक सिर हिला कर मना कर देते हैं। बार-बार ऐसा होने पर कामकाजी पेरेंट्स समझ नहीं पाते हैं कि बच्चों को रिस्पेक्ट करना कैसे सिखाएँ? आइये इस लेख के माध्यम से आपको इस संबंध में कुछ टिप्स देते हैं:

1. रोल मॉडल बनें:

छोटे बच्चे हमेशा वही करते हैं जो वो अपने माता-पिता को करते देखते हैं। जब वो आपको, अपने बड़ों का सम्मान करते देखेंगे तो, वो वही सब काम खुद ही करने लगेंगे।

2. जो चाहते हैं, वहीं करें:

आप अगर चाहते हैं कि छोटा बच्चा अच्छी बातें सीखें और सबके साथ प्यार से बातें करें, तब आपको वही सब कुछ उस बच्चे के साथ भी करना होगा। याद रखें, आप उसके रोल मॉडल हैं। इसलिए आप अपने बच्चे के साथ जैसा व्यवहार करेंगी, बच्चा उसे ही सही मानेगा और सबके साथ वही करेगा।

3. सॉरी और थैंक यू:

सॉरी और थैंक यू

किसी को सम्मान देने का सबसे पहला पाठ ‘सॉरी’ और ‘थैंक यू’ बोलना होता है। छोटे बच्चे खेल ही खेल में इसे सीख लेंगे अगर आप स्वयं उसके साथ बोलना शुरू करेंगे। इसके साथ ही उन्हें यह भी सिखाएँ कि इन शब्दों का प्रयोग न केवल अपने परिवार और दोस्तों में बोलना है बल्कि कोई अंजान भी अगर कुछ उनके लिए करता है, तब भी उन्हें इन शब्दों का प्रयोग करना है। ये दोनों शब्द आदर और सम्मान देने की सबसे पहली सीढ़ी माने जाते हैं।

4. तारीफ के दो बोल:

छोटे बच्चों को बोले गए तारीफ के दो बोल, किसी भी बड़े पुरस्कार से अधिक महत्वपूर्ण और मूल्यवान होते हैं। किसी भी अच्छी बात और अच्छे काम के करने पर पेरेंट्स से मिले तारीफ के बोल, न केवल बच्चों का उत्साह बढ़ाते हैं बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करते हैं।

5. मदद के दो हाथ:

मदद के दो हाथ

हमेशा बच्चों को अपने आसपास के लोगों की मदद करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें। घर के किसी सदस्य के आने पर दरवाज़ा खोलना, किसी गिरी हुई चीज़ को उठा कर देना और ऐसे ही कितने काम हैं जो नन्हें-मुन्ने खेल-खेल में कर सकते हैं। इसके बाद तोतले बोल से बोले हुए सॉरी और थैंक क्यू न केवल उन्हें रिस्पेक्ट का पाठ पढ़ाते हैं बल्कि आपकी भी थकान उतार देते हैं। ऐसा करने से बच्चे यह भी सीख जाएँगे कि किसी की मदद करने के बदले हमें कुछ मिलने की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

रोज़ की दिनचर्या में उठाए गए यह छोटे-छोटे कदम आपके नन्हें-मुन्नों को प्यार और सम्मान सिखाने के साथ एक अच्छा नागरिक भी सरलता से बना सकते हैं।

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