#lockdown: परेशान निर्माता, ऊबते सितारे, बड़े पर्दे पर कोरोना का कहर

दिन रात नियोन लाइटों के बीच रहने वाले सेलिब्रिटीज कैमरे से उस तरह रोमांचित नहीं होते, जिस तरह उन्हें 24 घंटों में महज कुछ मिनटों के लिए आम लोगों या आम जगहों में अपने चाहने वालों से रूबरू होने के दौरान रोमांच महसूस होता है.

अपने एक एक पल की मौजूदगी की सुर्खियां चाहने वाले बौलीवुड के तमाम सितारे इन दिनों घर में कैद हैं. ऐसे में ये चाहकर भी अपनी नयी स्टाइल वाली टोपी, कातिल हेयरकट और प्रैक्टिस से हासिल की गई स्माइल को अपने फैंस के बीच लाइव साझा नहीं कर पा रहे. हालांकि इस फ्रंट कैमरा युग में वर्चुअल मौजूदगी के लिए कहीं भी लाइव मंच की जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन दिन रात नियोन लाइटों के बीच रहने वाले सेलिब्रिटीज कैमरे से उस तरह रोमांचित नहीं होते, जिस तरह उन्हें 24 घंटों में महज कुछ मिनटों के लिए आम लोगों या आम जगहों में अपने चाहने वालों से रूबरू होने के दौरान रोमांच महसूस होता है. इसलिए भले कैटरीना कैफ घर में झाड़ू को क्रिकेट के बैट की तरह घुमाते हुए कुछ कमेडी पैदा करने की कोशिश कर रही हो या कि टाइगर श्राफ गाना गाकर अर्जुन कपूर को अपने एक और टैलेंट का पता दे रहे हों. लेकिन अगर समग्रता में देखें तो बौलीवुड के सितारे एक हफ्ते से भी कम के इस लाॅकडाउन में ऊब से गये हैं.

लेकिन बाॅलीवुड के सितारों से ज्यादा हालत इन दिनों बाॅलीवुड के निर्माताओं की खराब हो गई है. ऐसा नहीं है कि वे कोरोना से संक्रमित हो गये हैं. दरअसल कोरोना का कहर उनके पूरे कारोबार में इस तरह से छाया डालता दिख रहा है कि उन्हें लगने लगा है वह जल्द ही इसके कहर से नहीं ऊबर पाएंगे. यह स्वाभाविक भी है. एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बाॅलीवुड इंडस्ट्री इन दिनों पूरी तरह से कोरोना वायरस के चंगुल में फंस गई लगती है. अगर अगले एक महीने तक इसका संकट यूं ही बना रहा तो फिल्म कारोबारियों को तो जो नुकसान होगा, उसकी देर सवेर किसी न किसी रूप में भरपायी हो ही जायेगी. लेकिन फिल्म इंडस्ट्री से खास तौरपर बाॅलीवुड से जो करीब 10 लाख लोग प्रत्यक्ष तौरपर और करीब 2 करोड़ लोग अप्रत्यक्ष तौरपर जुड़े हैं, उनकी जिंदगी का सारा बजट गड़बड़ा जायेगा.

यूं भी साल 2020 अभी तक बाॅलीवुड के लिए वैसा नहीं रहा, जैसे होने की पिछले साल की पृष्ठभूमि में उम्मीद की गई थी. गौरतलब है कि साल 2020 में अभी तक कोई 42 फिल्में रिलीज हो चुकी हैं और सही बात यह है कि एक तानाजी को छोड़ दें तो किसी भी फिल्म ने 100 करोड़ रुपये का कारोबार इस साल अभी तक नहीं किया. हालांकि कई फिल्में बड़े जोर शोर से आयी थीं जैसे- दीपिका पादुकोण की ‘छपाक’, कंगना रानौत की ‘पंगा’, कियारा आडवानी की ‘थप्पड’़, रेमी डिसूजा की वरूण धवन और श्रद्धा कपूर स्टारर ‘स्ट्रीट डांसर 3-डी’, टाइगर श्राफ की ‘बागी-3’, कार्तिक आर्यन और सारा अली की जोड़ी वाली ‘लव आजकल’ और आयुष्मान खुराना की ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’. इन तमाम फिल्मों में ‘तानाजी’ के 280 करोड़ रुपये कमाने के अलावा एक बागी-3 ही ऐसी फिल्म है जिसके लिए कहा जा रहा है कि उसने 130 करोड़ रुपये कमाये बाकी ये तमाम फिल्में जिनका यहां जिक्र किया गया है, सफल रहने के बावजूद भी मुश्किल से अपनी लागत ही निकाल पायी हैं.

जबकि पिछले साल जिस तरह से 13 फिल्मों ने 100 करोड़ रुपये कमाई के क्लब में अपनी जगह बनायी थी, उसको देखते हुए लग रहा था कि इस साल भी काफी ज्यादा फिल्में 100 करोड़ रुपये की कमाई के क्लब की हिस्सेदार बनेंगी. मगर पहले साल की सुस्त शुरुआत और जब अभी बाॅलीवुड ने रफ्तार पकड़नी शुरु की तो कोरोना के कहर का टूटना, बाॅलीवुड के होश फाख्ता कर चुका है. शायद हाल के दशकों में किसी को भी यह याद नहीं होगा कि कब पूरे देश के सभी सिनेमाहाॅल एक साथ बंद हुए हों. जैसा कि इस समय 21 दिनों के टोटल लाॅकडाउन के चलते पूरे देश के सिनेमाहाॅलों में ताले बंद हैं. लेकिन इस देशव्यापी तालेबंदी के पहले भी अलग अलग राज्यों में कई हफ्तों से कोरोना के चलते मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन वाले सिनेमाहाॅल बंद हो रहे थे. कोरोना की पहली जो दो बड़ी फिल्में शिकार हुईं, उनमें एक थी ‘अंग्रेजी मीडियम’ और दूसरी ‘बागी-3’. इसके पहले की फिल्में अपनी कमजोर कहानियों, कामचलाऊ पटकथाओं और औसत सिनेमेटोग्राफी के चलते असफल हुई थीं. जबकि ये दोनो फिल्में सिर्फ और सिर्फ कोरोना के कहर का शिकार हुईं. वरना इनकी शुरुआती उठान को देखकर लग रहा था कि ये 100 करोड़ रुपये की कमाई के क्लब में प्रवेश करेंगी.

हालांकि बागी-3 के बारे में फिर भी ऐसी खबरें हैं जो शायद इस वजह से कि भारत में जो 9600 स्क्रींस हैं उनमें से ये करीब 5000 स्क्रीन में रिलीज हुई थी और 2000 से ज्यादा स्क्रीन में ‘अंग्रेजी मीडियम’. लेकिन इन दोनो फिल्मों ने जैसे ही अपनी रफ्तार पकड़ी कि उसके पहले कोरोना ने अपनी रफ्तार पकड़ ली. इस कारण ये दोनो फिल्में इसका शिकार हो गईं. अंग्रेजी मीडियम अच्छा कारोबार करने वाली थी; क्योंकि इसमें अपनी बीमारी से उबरे इरफान खान तो थे ही जो अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए जाने जाते हैं, इसमें करीना कपूर और राधिका मदान की भी खूब मंझी हुई अदाकारी वाली भूमिकाएं थीं. पूरी फिल्म की खूब तारीफ हो रही थी, लेकिन कोरोना के सामने सारी तारीफ बेकार हो गई. कोरोना के चलते मार्च के दूसरे सप्ताह में ऐसी स्थितियां बनी कि अंग्रेजी मीडियम 16 मार्च को महज 45 लाख रुपये का ही बिजनेस कर सकी. जबकि पहले दिन इसका बिजनेस काफी ज्यादा था.

हालांकि बागी-3 को लेकर अलग अलग खबरे हैं, कुछ का मानना है कि यह 130 रुपये करोड़ का बिजनेस कर चुकी है. जबकि कुछ दूसरी खबरें ऐसी भी हैं जिनके मुताबिक इसने महज 97 करोड़ रुपये का बिजनेस किया है. इस समय इंडस्ट्री के सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाले टाइगर श्राफ की इस फिल्म ने अगर महज 97 करोड़ का बिजनेस किया है तो सफल होने के बावजूद भी यह कारोबारी नजरिये से अपने निर्माताओं के लिए फायदेमंद नहीं है. क्योंकि फिल्म की लागत ही करीब 100 करोड़ रुपये कही जा रही है. ऐसे में अगर इसने वाकई 97 करोड़ रुपये कमाये हंै तो कारोबार के नजरिये से यह घाटे का सौदा है. इन दोनो के अलावा जो फिल्में मार्च के तीसरे और चैथे हफ्ते में रिलीज होने वाली थीं, उनमें से ज्यादातर की रिलीज डेट टाल दी गई है और कुछ की घोषणा ही नहीं हुई है. मसलन- रणवीर सिंह के अभिनय वाली ‘1983’, अमिताभ और आयुष्मान खुराना की ‘गुलाबो सिताबो’, ‘लूडो’ और जान्हवी कपूर की ‘गुंजन सक्सेना द कारगिल गर्ल’ के प्रदर्शन पर अनिश्चितता का काला पर्दा पड़ गया है. इस तरह देखें तो कोरोना ने इस देश में सबसे पहले फिल्म इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी है.

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